मालपुरा, दिनांक 05 व 06 सितम्बर 26 को हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 12वाँ राज्य अधिवेशन 2026 पांच सत्रों में पूर्ण हुआ । दिनांक 05सितम्बर 2026
प्रातः09 बजे संविधान गौरव पथ प्रदर्शन और ध्वजारो हन हुआ उसके पश्चात पहले सत्र का प्रारंभ हुआ जिसमें
विषय :-राष्ट्रीयकरण का पैगाम निजीकरण पर लगाम अर्थात राष्ट्रीयकरण से लोकतांत्रिक राज्य समाजवाद की ओर रखा गया ।
प्रथम सत्र का संचालन मू.सुरेंद्र कुमार गौतम,प्रदेश
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महासचिव राजस्थान द्वारा किया गया
प्रस्तावना मू. राम स्वरुप बैरवा ,प्रदेश अध्यक्ष राजस्थान द्वारा की गई
मुख्य अतिथि मू. रघुवीर मीना, सेवानिवृत IAS रहे
विशिष्ट अतिथि मू.सी. बी. यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर, मूल निवासी कृष्ण कुमार जानू प्रदेश महासचिव ,अखिल भारतीय जाट महासभा, मूल निवासी बाबूलाल बैरवा अधिवक्ता राजस्थान हाई कोर्ट , मूल निवासी रामेश्वर सेवार्थी सामाजिक चिंतक एवं कार्यकर्ता , मूल निवासी प्रेमचंद बेदरा प्रेमचंद बैदाडा CEC सदस्य एवं प्रभारी राजस्थान मूल निवासी संघ, मूलनिवासी श्रवण लाल बैरवा जिला अध्यक्ष बामसेफ टोंक,
अध्यक्षता मूल . सुरेश द्रविड़ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नई दिल्ली सभीवक्ताओं द्वारा विषय पर अपने अपने विचार व्यक्त किए।
05सितंबर2026 को दोपहर 03 बजे द्वितीय सत्र
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प्रारंभ हुआ । जिसमें समूह चर्चा एवं विषय :- -सांगठनिक विकास में आ रही सामाजिक, आर्थिक राजनीतिक चुनौतियां और उन्हें पार करने के उपाय - एक गंभीर कैडर परिचर्चा। पर रखी गई जिसमें
संचालन
मू.गोपाल लाल बैरवा, प्रदेश उपाध्यक्ष राजस्थान द्वारा किया गया
प्रस्तावना मू. निवासी नरेश कुमार बौद्ध कार्यालय सचिव राजस्थान द्वारा की गई
अध्यक्षता:मू. प्रेमपाल गौतम, राष्ट्रीय कार्यालय सचिव एवं प्रभारी राजस्थान द्वारा की गई
तृतीय सत्र संध्या 6.30 बजे से 9.30 बजे तक चला
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विषय:-सांगठनिक विकास में आ रही सामाजिक, आर्थिक राजनीतिक चुनौतियां और उन्हें पार करने के उपाय - एक गंभीर कैडर परिचर्चा।
पर चर्चा की गई जिसमें समूह चर्चा के नेतृत्व करता संचालन एवं अध्यक्षता उपरोक्त अनुसार की गई
दिनांक 06 सितम्बर 2026 रविवार को चाय नाश्ता
के बाद सभ्यता संघ का कलचर सत्र अधिवेशन के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की गई।
सत्र 4th और विशेष जन प्रबोधन सत्र आयोजित
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किया गया जिसका
विषय :- जाति जनगणना रोकने के ब्राह्मणवादी दाव -पेचों के खिलाफ राष्ट्रीय व्यापी जन आंदोलन की तत्काल दरकार मूल निवासियों की एक ही ललकार ओबीसी जनगणना हो हर हाल
संचालन:- मू. रमेश चंद्र बसवाल,प्रदेश कोषाध्यक्ष राज.
प्रस्तावना :- मू. मीना लोदवाल प्रदेश उपाध्यक्ष राज.
वक्तागण:- मू. रतन लाल बैरवा रिटायर्ड प्रधानाचार्य
मू. बी.एल. गुर्जर राज्य पुरूस्कृत अध्यापक
मू.जय नारायण प्रकाश संगठन सचिव रज.
मू. मुंशीलाल नागरवाल प्रदेशाध्यक्ष मू.संघ
मू. रमेश चंद्र वर्मा टेपन प्रदेश संगठन सचिव
मू. रामगोपाल वर्मा जिला संगठन सचिव,बूंदी
मू.शंभू दयाल मेहरा प्रदेश संगठन सचिव
मू. रामधन बैरवा जिलाध्यक्ष जिला टोंक
अध्यक्षता:- सुरेश द्रविड़, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नई दिल्ली
पांचवां सत्र : पांचवां सत्र समापन सत्र रहा जिसमें
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वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा सांगठनिक संदेश दिए गये
मार्गदर्शक: राज्य अध्यक्ष और प्रभारी रहें
सभी वक्ताओं द्वार जाति- जनगणना करवाने पर बल
दिया गया तथा OBC की जनगणना हर हाल व हर परिस्थिति में होना चाहिए
अन्य वक्ताओं के अंश निम्न प्रकार से है।
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जनगणना सिर्फ गिनती नहीं जनगणना एक हिस्सेदारी है बिना गिनती के नियोजन कैसा ? जब सरकार को पता ही नहीं है की किस-किस जाति की कितनी कितनी जनसंख्या है तो वह जातियों के विकास और उत्थान के लिए किस तरह से कार्य करेगी ? हम जनगणना की मांग इसलिए भी कर रहे है जिससे
नीति निर्माण को वास्तविक बनाया जा सके संसाधनों का न्याय पूर्ण वितरण करना वंचित वर्गों की स्थिति समझने और लोकतंत्र को अधिक प्रतिनिधित्व बनाना है। बिना जनगणना के वास्तविक स्थिति समझना कठिन होगा और जिनकी स्थिति समझी ही नहीं जाएगी उसके लिए सही नीति बनाना भी कठिन होगा
हमारी मांग सही आंकड़े सही नीति सही प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय है।
यदि समाज में असमानता है , अवसरों में असमानता है, प्रतिनिधित्व में असमानता है, तो केवल राजनीतिक लोकतंत्र पर्याप्त नहीं होगा हमें सामाजिक लोकतंत्र की ओर बढ़ना होगा और सामाजिक लोकतंत्र के लिए वास्तविक स्थिति को समझना आवश्यक होगा।हमारी
लड़ाई किसी जाति धर्म के खिलाफ नहीं है।
हमारी लड़ाई है:--
असमानता के खिलाफ
भेदभाव के खिलाफ
अवसरों कि असमानता के खिलाफ
और ऐसी नीतियों के खिलाफ जो वास्तविक सामाजिक स्थिति को समझे बिना बनाई जाये
हम चाहते है कि देश आगे बढ़े लेकिन ऐसा विकास जिसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी हो
अगर OBC सहित जनगणना नहीं हुई तो
सामाजिक न्याय कि लड़ाई में हमारा आंदोलन निम्न चरण बद्ध तरीकों से होगा
1. संवैधानिक आंदोलन
2. तथ्य आधारित आंदोलन
3.व्यापक जन संवाद
4. संगठन की मजबूती
5शांति पूर्ण लोकतांत्रिक जन दबाव